Monday, October 18, 2010

आधुनिक कविता इतिहास

यद्यपि गढवाली कविता कि समालोचना एवं कवियों कि जीवनवृति लिखने कि शुरुआत पंडित तारादत्त गैरोला ने १९३७ ई. से की किन्तु अबोधबंधु बहुगुणा को गढवाली कविता और गद्य का क्रमगत इतिहास लिखने का श्रेय जाता है। अतः कविता काल कि परिसीमन उन्हीं के अनुसार आज भी हो रही है। इस लेख में भी गढवाली कविता कालखंड बहुगुणा के अनुसार ही विभाजित की जाएगी डा. नन्दकिशोर ढौंडियाल ने कालखंड के स्थान पर नामों को महत्व दिया। जैसे पांथरी युग या सिंह युग।
@Bhishma Kukreti

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