29 November, 2010

दारु

दारु !
पगळीं च बगणि च
डांडी कांठ्यों धरु-धरु
पीड़ बिसरौण कु
माथमि, द्यब्तौं सि सारु

गंगा उंद बगदी
दारु उबां-उबां टपदी
पैलि अंज्वाळ् अदुड़ि/
फेर, पव्वा सेर
जै नि खपदी
हे राम! दअ बिचारु

गबळान्दि बाच
ढगड्यांदि खुट्टी
अंगोठा का मुखारा
अंग्रेजी फुकदी गिच्ची
कुठार रीता शरेल् पीता
ठुंगार मा लोण कु गारु

पौंणै बरात
मड़्वयों कु सात
बग्त कि बात
दारु नि हात
त क्य च औकात
छौंदि मा कु खारु

नाज मैंगु काज मैंगु
आज मैंगु रिवाज मैंगु
दारु बोदा त
दअ बै क्य च फारु

Source : Jyundal (A Collection of Garhwali Poems)
Copyright@ Dhanesh Kothari

28 November, 2010

सौदेर

माया का सौदेर छां हम
इन्कलाब जिन्दाबाद
बैर्यों बग्तौ चेति जावा
निथर होण मुर्दाबाद

कथगै अंधेरू होलु
हम उज्याळु कैद्योंला
भाना कि बिंदुलि मा
गैणौं तैं सजै द्योंला
हम सणि अळ्झाण कु
कत्तै करा न घेरबाड़

हत्तकड़ी मा जकड़ि पकड़ी
जेल भेजा चा डरा
बणिगेन हथगुळी मुट्ट
इंतजार अब जरा
लांकि मा च प्रण प्रण
लौटा छोड़ा हमरी धद्द

क्रांतिकारी भौंण गुंजणी
हिमाला कु सजायुं ताज
मौळ्यार कि टक्क धरिं च
घाम बि जग्वाळ् आज
हम सणिं बिराण कु
जम्मै न कर्यान् उछ्याद

Source : Jyundal (A Collection of Garhwali Poems)
Copyright@ Dhanesh Kothari

26 November, 2010

फेक्वाळ्

https://bolpahadi.blogspot.in/
भुयां खुट्ट धन्नौ जगा नि
अंरोंगु कखि छोड़युं नि
संगति फैल्यान्
सेमा सि फेक्वाळ्

धुर्पळा कि पठाळी उठा
चौक का तीर जा
तिबारि मा
ह्‌यूंदौ घाम तपदु
रात्यों हुंगरा लगान्द देखा

खालि जांद्रा घुमौन्दु
बांजा घट्टुं भग्वाड़ि मंगदु
खर्ड़ी डाल्यों छैल घाम तपदु
रीता उर्ख्याळौं कुटद
गंज्याळु सी देखा

चम्म सुलार कुर्ता
ट्वपली मा
मंगत्यों कि टोल
बर्खदा बसग्याळ्
छुमछ्योंदा अकाळ्
दिल्ली का दिलन्
देरादुण कु पैसा
लुटौंदु देखा

संगति फैल्यान्...

Source : Jyundal (A Collection of Garhwali Poems)
Copyright@ Dhanesh Kothari

22 November, 2010

कौन डरता है खंडूरीराज से ?

क्या भविष्य में भी भारतीय जनता पार्टी पूर्व मुख्यमंत्री रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल भुवनचंद्र खंडूरी के नेतृत्व में दुबारा चुनाव के मैदान में कुद सकेगी? बाबा रामदेव के दो करोड़ की रिश्वत के खुलासे के बाद शायद यह सवाल उत्तराखण्ड के बहुत से लोगों को मथ रहा होगा। 

हालांकि अभी किसी के नाम का खुलासा नहीं हुआ है। हो सकता है कि समय रहते कंट्रोलरों के द्वारा सब कुछ नेपथ्य में धकेल दिया जाय और खुलासे का बुलबुला फूटने से पहले ही सिकुड़ जाये। यहां सवाल यह भी उभरकर सामने आता है कि आखिर खंडूरी राज से किसे डर लगता है। उत्तराखण्ड राज्य के वर्तमान विपक्ष को, पार्टी के ही कुछ सहयोगियों को, नौकरशाहों को, माफिया तंत्र को या फिर बाबा रामदेव को जो अब अपनी राजनीतिक पारी को शुरू करने की जमीन बनाने लगे हैं। 

अतीत में इसका कुछ अहसास मिल जायेगा। जब फ्लैश बैक में जाकर उस दिन को देखा जाय, जब खंडूरी राज की विदाई के बाद तत्कालीनडरे हुए लोगों की भीड़ नये राजा के देहरादून पहुंचने और ताजपोशी होने तक उन्मादित थी। दूसरा गुजरा हुआ लोकसभा चुनाव जिसमें कांग्रेस को राज्य की पांचों सीट आसानी से जितने दी गई थी। इसी फ्लैश बैक में देखें तो निश्चित ही खंडूरी के शासनकाल में भू माफियाओं को अपने धंधे की वाट लगती दिखाई दी। 

नौकरशाहों के साथ ही ट्रांसफर-पोस्टिंग से गुजारा करने वालों में भी असहजता रही। अपने नेताओं पर चुनाव में पैसा लगा चुके लोगों की बेहतर रिर्टन की उम्मीद धूमिल होने लगी थी। ऐसा ही काफी कुछ है जिसे सिलसिलेवार गिना जा सकता है। आज के परिदृश्य में देखें तो तिवारीराज की ताजगी सभी को दिखाई दे रही है। लाल नीली बत्तियों के साथ ही गाहेबगाहे ठसक के दर्शन हो रहे हैं। मलाई के लिए बीते कुंभ के बाद प्रकृति ने भी मेहरबानी कर आपदा का मुंह खोल दिया। 

साहित्य से लालित्य तक हर तरफ खुशगवार मौसम दिख रहा है। ऐसे में यदि आंकलन करें और माने की अगले चुनाव में क्या होगा? तो साफ लगता है कि डरने वालों की फेहरिस्त लंबी हो सकती है। लिहाजा यदि आने वाले दिनों में एक ही नहीं कई बाबा दुर्वासा का स्वांग भर लें तो अचरज में नहीं आना चाहिए। बाबा रामदेव का अधूरा सच (क्योंकि नामों का खुलासा अब तक नहीं हुआ है) तो यही कुछ संकेत देता है। सो जब जनरल जंग के मैदान में पैदल हो जायेंगे तो चित्त-पट्ट के खेल को मनमाफिक खेला जा सकता है। 

लेकिन इसके आगे भी एक ताकत है जो आज भी कुछ उसी अंदाज में (उत्तराखण्ड से तो उप्र ही अच्छा था ) कहती है कि, खंडूरीराज इस नवेले राज्य के लिए बेहतर था।

21 November, 2010

सिखै

सि
हमरा बीच बजार
दुकानि खोली
भैजी अर भुला
ब्वन्न सिखीगेन

मि
देळी भैर जैकि
भैजी अर भुला
ब्वन्न मा
शर्माणूं सिखीग्यों

Copyright@ Dhanesh Kothari

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