28 November, 2010

सौदेर

माया का सौदेर छां हम
इन्कलाब जिन्दाबाद
बैर्यों बग्तौ चेति जावा
निथर होण मुर्दाबाद

कथगै अंधेरू होलु
हम उज्याळु कैद्योंला
भाना कि बिंदुलि मा
गैणौं तैं सजै द्योंला
हम सणि अळ्झाण कु
कत्तै करा न घेरबाड़

हत्तकड़ी मा जकड़ि पकड़ी
जेल भेजा चा डरा
बणिगेन हथगुळी मुट्ट
इंतजार अब जरा
लांकि मा च प्रण प्रण
लौटा छोड़ा हमरी धद्द

क्रांतिकारी भौंण गुंजणी
हिमाला कु सजायुं ताज
मौळ्यार कि टक्क धरिं च
घाम बि जग्वाळ् आज
हम सणिं बिराण कु
जम्मै न कर्यान् उछ्याद

Source : Jyundal (A Collection of Garhwali Poems)
Copyright@ Dhanesh Kothari

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