Saturday, August 14, 2010

आवाज


तुम्हारे शब्द
मेरे शब्दों से मिलते हैं
हमारा मौन टुटता
नजर भी आता है
वो तानाशाह है
हमारी देहरी पर
हम अपनी मांद से निकलें
तो बात बन जाये

वो देखो आ रही हैं
बुटों बटों की आवाजें
म्यान सहमी है
सान चढ़ती तलवारें
मुट्‍ठियां भींच कर लहरायें
तो देखो
कारवां बन जाये

चंद मोहरों की चाल टेढ़ी है
प्यादे गुमराह कत्ल होते हैं
शह की हर चाल
रख के देखो तो
मात निश्चित
उन्हीं की हो जाये
तुम्हारे शब्द...........।

Copyright@ Dhanesh Kothari

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