Monday, August 09, 2010

बणिगे डाम


बणिगे डाम
लगिगे घाम
प्वड़िगे डाम
मिलिगेन दाम


सिद्ध विद़द
खिद्वा गिद्ध
उतरिगेन लांकि मान


सैंन्वार खत्म
सीढ़ी शुरू
उकाळ उंदार
घुम कटै


जुल्म संघर्ष
हर्ष विमर्श
समैगे अब समौ


स्वाद स्याणि
तिलक छींटू
पाणि पाणि
हे राम


ब्याळी आज
आज भोळ
डुब डुब
मिलिगे दाम

Source : Jyundal (A Collection of Garhwali Poems)
Copyright@ Dhanesh Kothari

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