Saturday, February 25, 2012

बुडया लापता : रौंस दिलंदेर हंसोड्या स्वांग फाड़ी - १



मुंबई का सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी, लिखवार, स्वांगकर्ता भग्यान दिनेश भारद्वाज ,

अर सामाजिक कार्यकर्ता रमण कुकरेती को लिख्युं नाटक 'बुडया लापता' पर लिखण से पैली

नाटक कत्ति किस्मौ होन्दन पर ज़रा छ्वीं लगी जवान त ठीकि रालो
स्वांग/नाटकूं तैं भौं भौं ढंग मा फड़े (विभाजित ) जै सक्यांद
- रचनौ हिसाबन- एक दृषौ एकांकी, बिंडी दृश्यौ एकांकी, सूत्रधारी अर एक पात्रीय नाटक
२-साधनौ हिसाबन - स्टेज, टेलीविजन/वीडिओ/फिल्म/रेडिओ , नुक्कड़ बानौ जन स्वांग

३- भाषौ हिसाबन - गद्यात्मक, पद्यात्मक, गद्य-पद्य वळ, म्यूजिकल ड्रामा
४- वाद या सिधांत वळा स्वांग - आदर्शवादी, असलियत वादी , अति असलियत वादी, प्रगतिवादी, साम्यवादी या समाजवादी,

धार्मिक पंथवादी, कलावादी, प्रभाव वादी, प्रतीकात्मक या हौर कें हैंकि कला से प्रभावित नाटक
५- विषयौ हिसाबन - सामाजिक, इतियासौ , राजनैतिक, चरित्र प्रधान स्वांग
६-बृति हिसाबन - समस्या प्रधान, व्यंगात्मक , हंसोड़ी गम्भीर, आलोचनात्मक , अनुभूति प्रधान जन रुवाण वळ आदि

७- ब्युंत/शैली हिसाबन - शब्द-अर्थ से सरल वळ, चबोड्या /व्यंगात्मक, हंसोड्या, विचार प्रधानी , गिताड़, भड़ प्रधान/ओज पूर्ण ,
८ -अंत हिसाबन - दुख्यर अंत, सुख्यरु अंत, मजेदार /रौन्सदार

कौमेडी या हंसोड्या स्वान्गुं बारा मा कुछ विचार
कॉमेडी पर भौत सा विचार छन अर हंसोड्या स्वांग दुन्या मा भाषौ दगड़ इ ऐ गे होला

कॉमेडी स्वान्गुं बारा मा संक्षेप मा जणगरूं इन विचार छन
१- पुराणो भारतीय हंसोड्या ब्यूंत - विदुसक को होण जरूरी छौ. इक तलक की बीसवीं सदी मा
अमिताभ बच्चन को आण से पैल हिंदी फिल्मुं या भारतीय फिल्मुं मा हीरो क अलावा हंसोड्या कलाकार फिल्मुं मा जरुरी

छया. आज बि इनी च
२- पुराणो युनानौ ब्यूंत :प्रथम, मध्य अर आधुनिक अर अरिस्टोफेंस व मेनानडर का स्वांग प्रसिद्ध छन
३- पुराणो रोमनौ ब्यूंत ; यूनान बिटेन जयुं ब्यूंत रोम मा खूब फल अर फब बि च . प्लेटो अर टेरेंस कॉमेडी क फून्दा स्वान्ग्कार माने जान्दन .

रोम मा स्टौक चरित्रुं भरमार राई जन कि ऐडलेसेन्स, सेनेक्ष, लीनो, माइल्स ग्लोरिऔस , पैरासिट्स, गुलाम, अनसिला, मैट्रोना, मेरेत्रिक्ष,
अर विर्गो .
खौंळयाणो बात या च यूँ चरित्रुं बारा मा वात्सायन न अपण 'काम सूत्र' मा वर्णन कर्युं च .

४- बुरलेस्क ब्यूंत : सोळवीं सदी मा इटली अर फ़्रांस मा जनम्युं सत्र्वीं सदी मा सरा यूरोप मा फैल.
५- सिटिजन कौमेडी : लन्दन मा सोळवीं सदी मा यू ब्यूंत प्रसिद्ध ह्व़े अर ये ब्यूंतौ नाम ऐलिजाबेतियन,

जाकोबियन,कारोलाइन बि च. बेन जौनसन, थॉमस मिडलटन अर जौन मार्सटन प्रसिद्ध स्वान्ग्कार ह्वेन
६- जोकर या क्लाउन्स - पच्छमी साहित्यकार माणदन बल मिश्र मा ४५०० साल पैल जोकर ब्युंत आई पन ये इ समौ पर

भारत मा विदूषक स्वान्गुं मा छया अर जानको पुरो वर्णन भारत मुनि क नाट्य शाश्त्र मा विदूषक तकरीबन जोकर बि होंद थौ.
आज सर्कस क अलावा स्वान्गुं मा जोकरूं महत्ता बचीं च
७- कौमेडी ऑफ़ ह्युमर्स: हजारों साल पैल नाट्य शास्त्र मा नाटकुं मा हौंस कनै पैदा करे जान्द मा जानकारी दिए गे.

यूरोप मा सोळवीं सदी मा कौमेडी ऑफ़ ह्युमर्स तैं प्रसिधी मील अर धड्वे छ्या स्वान्ग्कार -बेन जौनसन अर जौर्ज चैपमैन
८- स्थितियूँ से जन्मीं कॉमेडी या कौमेडी ऑफ़ इन्ट्रीग: ये ब्यूंतौ निकोलो माछिवेली अर लोप डे विगा प्रसिद्ध स्वांग लिख्वार ह्वेन

९- कॉमेडी ऑफ़ मैनर्स : कौमेडी ऑफ़ मैनर्स मा कें ख़ास ज़ात/वर्ग पर व्यंग्य करे जांद अर वीं ज़ात या वै वर्ग का ख़ास
चरित्रुं खाल खैंचे जान्द . विलियम कंग्रीव आदि प्रसिद्ध ह्वेन

१०- ड़रयौण्या -धमकौण्या कॉमेडी : कॉमेडी ऑफ़ मेनास क जनम डेविड क्रौम्पटन (१९५८) को स्वांग 'दि लुनाटिक व्यू' से ह्व़े.
इन स्वान्गुं मा ध्वंस बृति पाए जान्द अर फिर हौंस पैदा करे जान्द

११- कळकळी अर हौंसौ मिळवाक, कोमेडी लैमोयांटे या कॉमेडी ऑफ़ टियर्स : उन त यू ब्यूंत सबि लोक नाटकुं मा मिल्दो पण साहित्यौ हिसाबन
पैल पैलु कॉमेडी ऑफ़ टियर्स फ़्रांस मा अठारवीं सदी मा शुरू ह्व़े. थौमस हेवुड ये ब्युंत को मास्टर बुले जान्द

१२- मुखौटों कौंळ : या विधि सोळवीं सदी मा इटली मा शुरू ह्व़े छे जां मा चरित्र को मुख सजाये जान्द, जांको जिक्र नाट्य शाश्त्र मा छें च
फ़्रांस को जैक कोपे (१८७९-१९४९) न ये ब्यूंत से आधुनिक स्वान्गुं तैं गाँ गाँ पंहुचाये.

१३- भावनात्मक हंस्योड्या स्वांग : यूरोप मा कोली सिब्बर अर रिचर्ड स्टीले ये ब्युंत का सूत्रधार माने जान्दन
१४- अति यथार्थवादी : बीसवीं सदी क देन यीं ल़ा शाखा मा बि हंसदेरा स्वांग छन.

१५-तर्कहीन या अब्सर्ड नाटक : अब्सर्ड नाटकुं शुरुवात १९६० को उपरान्त ह्व़े अर अब्सर्ड नाटकुं मा कौमेडी बि च.
अब्सर्ड नाटककारूं मा सैमुअल बेकेट , यूजीन लोनेस्को जीन जेनेट जां नाटककार प्रसिद्ध छन. दिखे जाव त अब्सर्ड मा प्रकृति वाद इ च

इख्मा गाळी गलौज तैं बुरु नि माने जान्द
सन्दर्भ -
१- भारत नाट्य शाश्त्र अर भौं भौं आलोचकुं मीमांशा
२- भौं भौं उपनिषद
३- शंकर की आत्मा की कवितानुमा प्रार्थना ४-और्बास , एरिक , १९४६ , मिमेसिस
५- अरस्तु क पोएटिक्स

६- प्लेटो क रिपब्लिक
७-काव्यप्रकाश, ध्वन्यालोक ,
८- इम्मैनुअल कांट को साहित्य
९- हेनरिक इब्सन क नाटकूं पर विचार

१०- डा हरद्वारी लाल शर्मा
११ - ड्रामा लिटरेचर
१२ - डा सूरज कांत शर्मा
१३- इरविंग वार्डले, थियेटर क्रिटीसिज्म

१४- भीष्म कुकरेती क लेख
१५- डा दाताराम पुरोहित क लेख १६- अबोध बंधु बहुगुणा अर डा हरि दत्त भट्ट शैलेश का लेख
१७- शंकर भाष्य

१८- मारजोरी बौल्टन, १९६०. ऐनोटोमी ऑफ़ ड्रामा
१९- अल्लार्ड़ैस निकोल
२० -डा डी. एन श्रीवास्तव, व्यवहारिक मनोविज्ञान
२१- डा. कृष्ण चन्द्र शर्मा , एकांकी संकलन मा भूमिका

२२- ए सी.स्कौट, १९५७, द क्लासिकल थियेटर ऑफ़ चाइना
२३-मारेन एलवुड ,१९४९, कैरेकटर्स मेक युअर स्टोरी

बकै अग्वाड़ी क सोळियूँ मा......बुडया लापता : रौंस दिलंदेर हंसोड्या स्वांग फाड़ी -२

फाड़ी -१
१- नरेंद्र कठैत का नाटक डा ' आशाराम ' मा भाव
२-- भीष्म कुकरेती क नाटक ' बखरौं ग्वेर स्याळ ' मा बचळयात /वार्तालाप/डाइलोग

3- कुलानंद घनसाला औ नाटक संसार

फाड़ी -2
१--स्वरूप ढौंडियालौ मंगतू बौळया
२ - स्वरूप ढौंडियालौ अदालत
Copyright@ Bhishm Kukreti

Popular Posts

Blog Archive