Sunday, October 18, 2015

जै दिन

जै दिन

जै दिन
मेरा गोरू
तेरि सग्वाड़यों, तेरि पुंगड़यों
उजाड़ खै जाला
जै दिन
झालू कि काखड़ी
चोरे जालि

जै दिन
धारु धारु कि घस्येनि
हपार धै लगालि
तब सम्झलू कि-
गौं आबाद छन।

सर्वाधिकार- धनेश कोठारी 

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