Tuesday, August 14, 2012

गढ़वाली कहावतें/लोकोक्तियां 04



पौणा न्‍यूड़ बल खाणू
अर नौना न्‍यूड़ सेणू

कजेल्‍न करि बल सर्पै सौर
अर वू तणेण तणेण क मौर

भैंस्‍यो मोळ बल भैंसी का ई ढमणा

ज्‍यूंदा मा नि दे बल मांड
अर मोरी खैंडी खांड

ब्‍वारि बल धाण नि च
त् बळदौ कैनू कन्‍यो

बिगर अफ्वू म्‍वर्यां बल स्‍वर्ग नि मिल्‍द

रज्‍जा लगि बल भात
अर म्‍हैन्‍तै फूटी छत्ति

कैकू किल्‍ला घैंट्यां कू भाग
कैकू जुड़ु ब्‍वट्यां कू भाग

स्रोत- बुढ़ पुराणौं से सुणि अर अन्‍य माध्‍यमूं से संकलित
संकलनकर्ता - धनेश कोठारी

Popular Posts

Blog Archive