Wednesday, August 01, 2012

गढ़वाळी औखाणा (कहावतें) 01

Garhwali proverbs and sayings
गढ़वाळी औखाणा (कहावतें)

 जांदि दा क्यण पुछण औंदि दां पुछलू
 बैर्यो बाछरु बल पिजायां सुख
 घुटदौं त गिच्चू अर थुक्दौं त अखर्त जांदू
 खाणू बल गुड अर बतौण पिन्ना
 दाना गोरु क्यर देखण बल सींग अर खूर
 सुंगरौ पोथलू बल खारै पाण
 गल्ला न पल्ला अर द्वी ब्यौर कर्ला
 बड़ा बैरि कू बल बड़ू मान
 हुणत्यारळी डाळी का चल चला पात
 रांडूं का ह्वेन पांजा अर गौं पड़ीन बांजा
 ढुंगा ही कुंगळा होंदा त क्यं सयाळ भूख मर्दा
 नौ मण बल नंदू कौंका खौन्
   अर ऊंका छांछ मांगणौ जौन
 तू बल ठगणि कू ठग अर मैं जाति कू ठग
 घूंड-घूंडो फूकेग्यों पण कुल्डा्ण नि आई
 ओबरा अड़ायां बल पांडा का सट्ट
 जख बल सौ सल्लील वख कबि नि भल्ली
 मुंड्डौ नौ बल कपाल
 सर्री ढ्यबरी बल मुंडी मांडी अर पुछै दां लराट
 अंध्यारै कि मार बल खबर ना सार
 आप घोड़ी न बाप घोड़ी बिराणि घोड़ीन् दांत तोड़ी
 खायूं पेयूं तन रीझू अर देयूं लेयूं संगति मा जावू
 ब्वैं बाबूं क बिगाड़्यां नौ अर चकड़ैतूं का खोयां गौं सुधर्दा निन
 सिल्लूप खोवू हैंकै मौ अर तैलू खोवू अपणि
 दोण नि सकदों बल बिश्वा सकदौं
 अफ्फू चौड़ा बजार सांगड़ा
 का बुबा बल रिक्क न् खार्इ वू काळा खुंडगा देखि बि डौरु
 कागा कक्ड़ांदी रौ अर पिन्ना पकदी रौ
 कागा खाऊ त खाऊ निथर बिक्ख़ त बढ़ाऊ
 जो‍‍गी भागि बल हग्ण बिटी
 सौ गिच्चात अर एक किस्सा
 दाणि दाणि कै रास अर डाल्ली-डाल्ली कै घास
 टोप्ला टळळू जन कना बचण से मन्नु भलू
 अभागी ल्हिगे बल बाग अर भग्या‍नूं पडि़ जाग
 खा पौंणा घौर कि छौंदी
 मंगत्यों गै बल मान अर फगत्यों गै दान
 अति उछड़ू भतेड़ी क पड़ू

स्रोत- बुढ़ पुराणौं से सुणि अर अन्य् माध्यदमूं से संकलित
संकलनकर्ता - धनेश कोठारी,

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